राजधानी लखनऊ में शनिवार को चारबाग स्टेशन के पीछे रेलवे कॉलोनी की पुरानी इमारत में फर्जी रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाए जाने का पर्दाफाश हुआ है। रेलवे की फर्जी वेबसाइट बनाकर बेरोजगारों को नौकरी के नाम पर ठगने वाले गैंग का मास्टरमाइंड इस इंस्टीट्यूट को लगभग सात महीने से चला रहा था। गुजरात के एक बेरोजगार युवक की शिकायत पर राजकोट की क्राइम ब्रांच व पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की टीम ने शनिवार को आरोपी अटल त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया।

डीसीपी मध्य सोमेन बर्मा ने बताया कि राजकोट के युवक को गैंग ने मोटी रकम वसूलकर ट्रेनिंग के लिए लखनऊ बुलाया था। ट्रेनिंग के दौरान ठगी का अंदेशा होने पर वह युवक राजकोट लौट गया और वहां धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। इस पर राजकोट की क्राइम ब्रांच टीम सप्ताह भर पहले लखनऊ आई थी। पांच दिन पहले गैंग के मास्टरमाइंड हिमांशु पांडेय को लखनऊ में ही दबोच लिया गया था।

हिमांशु देवरिया के ग्राम पिपराइच, थाना रामपुर कारखाना का रहने वाला है और यहां सुशांत गोल्फ सिटी के अलकनंदा इंक्लेव में रहता था। उसी की निशानदेही पर शनिवार को अटल त्रिपाठी निवासी अलीनगर सुनहरा, थाना कृष्णानगर को गिरफ्तार करके बरोजगारों से ठगी के सात लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

किराए पर ली थी रेलवे कॉलोनी की इमारत
डीसीपी मध्य ने बताया कि अटल के पिता रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। इससे अटल को चारबाग स्टेशन के पीछे उत्तर रेलवे की जर्जर पड़ी एक इमारत किराए लेने में मदद मिली। इस इमारत का किराया 20 हजार रुपये प्रति माह था। इसके बाद हिमांशु पांडेय की मदद से इस इमारत की मरम्मत कराकर उसमें फर्जी रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोला गया। लेकिन रेलवे के अधिकारियों, आरपीएफ और जीआरपी तक को इसकी भनक नहीं लगी।

नौकरी की आस में ट्र्रेनिंग ले रहे थे 25-30 युवा
पुलिस के मुताबिक वर्तमान में इस फर्जी रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में लगभग 25-30 युवक प्रशिक्षण ले रहे थे। गैंग ने मोटी रकम वसूल कर उन्हें रेलवे में बड़ी तनख्वाह पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। सूत्रों का कहना है कि ठगी के शिकार हुए ये युवा जल्द ही धोखाधड़ी का रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।