म्यांमार में सैन्य शासन का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने रविवार को ‘ईस्टर एग’ को अपना ‘बग़ावत का प्रतीक’ बनाया है.

लोग ‘ईस्टर एग’ के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं. इन तस्वीरों में कई नारे लिखे हुए हैं और लोगों की माँग है कि म्यांमार में लोकतंत्र को बहाल किया जाये.

1 फ़रवरी को म्यांमार में तख़्तापलट के बाद, सैन्य शासकों ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और आंग सान सू ची समेत चुनी हुई सरकार के तमाम अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था.

इसके ख़िलाफ़ म्यांमार के नागरिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों में अब तक 557 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

‘द असिस्टेंस एसोसिएशन फ़ॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर्स’ (एएपीपी) नाम के एक कार्यकर्ता समूह ने यह आंकड़ा जारी किया है.

यह समूह तख़्तापलट के बाद से ही विरोध प्रदर्शनों में घायल हुए और मारे गये लोगों की गिनती का काम कर रहा है.

इस समूह का कहना है कि बर्मा के लोग सैन्य तानाशाही के अंत तक और लोकतंत्र की बहाली तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे.

एएपीपी के अनुसार, 2600 से ज़्यादा लोग पुलिस की हिरासत में हैं.

प्रदर्शनों में मरने वालों की बढ़ती संख्या के बावजूद, म्यांमार के विभिन्न शहरों में हो रहे प्रदर्शनों में शामिल होने वालों की संख्या कम नहीं हुई है.

इस बीच म्यांमार की सेना लगातार लोगों के आपसी संवाद पर रोक लगाने की कोशिशें कर रही है.

शुक्रवार से म्यांमार में मोबाइल इंटरनेट बंद है. सिर्फ़ फ़िक्स लाइन का इस्तेमाल करने वाले लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं.

वहीं प्रशासन ने म्यांमार के कम से कम 40 नामचीन लोगों के ख़िलाफ़ वारंट जारी किये हैं. प्रशासन ने इन लोगों का अपराध बताते हुए कहा कि इन लोगों ने म्यांमार में सैन्य शासन का विरोध किया.