अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार शनिवार को पंजाब के अबोहर में बीजेपी विधायक अरुण नारंग नाराज़ किसानों के ग़ुस्से का शिकार हो गए.

केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों से नाराज़ लोगों ने मलोट इलाक़े में विधायक नारंग पर हमला कर दिया.

इस हमले में विधायक के कपड़े पूरी तरह फट गए और पुलिस ने किसी तरह उन्हें हिंसक भीड़ से बचाया.

राज्य में कांग्रेस सरकार के चार साल पूरे होने पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस किया था. अबोहर विधायक समेत बीजेपी के कई नेता मलोट कार्यालय की तरफ़ जा रहे थे. जैसे ही नारंग अपनी कार से उतरे नाराज़ किसानों ने उन्हें घेर लिया और हमला कर दिया.

किसानों के गु़स्से को देखते हुए बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी रद्द कर दी. संयुक्त किसान मोर्चा ने इस घटना पर खेद जताया है.

उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, “किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया और विधायक को शारीरिक तौर पर चोट पहुंचाया गया. यह अफ़सोस की बात है कि एक चुने हुए जन प्रतिनिधि के साथ ऐसा किया गया. हमलोग इस तरह की हरकत को बढ़ावा नहीं देते हैं. हमलोग इसकी सख़्ती से निंदा करते हैं.”

हालाँकि बयान में यह भी कहा गया है कि इसके लिए बीजेपी और उनके समर्थक दल ज़िम्मेदार हैं.

संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है.

उधर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह को नहीं रिहा किया गया तो किसान सभी नेताओं को नज़रबंद करना शुरू कर देंगे.

युद्धवीर सिंह शुक्रवार को अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रहे थे जब गुजरात पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.

टिकैत ने इसी बहाने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा, यही असल गुजरात मॉडल है जो हम लोगों को बताना चाहते थे. गुजरात में लोग पूरी तरह से बंधे हुए हैं.

28 मार्च को होलिका दहन पर किसानों ने तीनों कृषि क़ानूनों की प्रतियां जलाने का निर्णय लिया है.