गोरखपुर
शनिवार को गोरखपुर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाथ पंथ का वैश्विक प्रदेय विषय पर अन्तराष्ट्रीय सेमिनार में बतौर अध्यक्ष सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने नाथपंथ के समृद्धि पर चर्चा करते हुए कहा कि नाथपंथ की परंपरा बेहद पुरानी है, तिब्बत से श्रीलंका और पाकिस्तान से बांग्लादेश तक नाथपंथ की परंपरा है, इस दौरान मंच से सीएम ने नाथपंथ के कई किस्सों को भी साझा किया।
गोरखपुर में CM योगी ने गिनाई नाथ पंथ की खूबियां, बोले- देश से लेकर विदेश तक मिलेगी छाप

‘झोपडी से राजमहल तक रही है नाथपंथ की परंपरा’
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्विद्यालय में तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ बतौर अध्यक्ष शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ‘नाथपंथ के अन्तराष्ट्रीय प्रदेय’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि नाथ पंथ की परंपरा बेहद पुरानी है, जिसके किस्से झोपडी से लेकर राजमहल तक मिल जाएंगे। इस दौरान उन्होंने कई किस्सों को साझा करते हुए नाथ पंथ की वैश्विक महत्व का गुणगान किया है। उन्होंने मंच से कहा कि नाथपंथ का देश के अंदर और विश्व के प्रमुख स्थलों में हम अवलोकन कर सकते हैं

‘तिब्बत, नेपाल,श्रीलंका, पाकिस्तान हर जगह रही परंपरा’
सीएम योगी ने कहा कि यह तिब्बत, नेपाल,श्रीलंका, पाकिस्तान के पेशावर और बांग्लादेश के ढाका में भी इसकी प्रमुखता का वर्णन किया गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल के दांग के राजकुमार राजा रतन ने नाथपंथ की परंपरा को नेपाल में फैलाया,उसी नाम से उनका एक दरगाह दिल्ली और एक अफगानिस्तान के काबुल में है। वहीं बांग्लादेश के ढाका में ढाकेश्वरी देवी का मंदिर है। जहां शोधार्थी नाथपंथ विषय पर रिसर्च करने के लिए जाते हैं।

नाथ पंथ से योग का है गहरा नाता
नाथ पंथ के वैश्विक महत्व की चर्चा करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि आज योग पुरे विश्व में प्रचलित है। कोई भी आसन हो उसका नाथपंथ से जुड़ा होने का प्रमाण मिल जाएगा। जैसे गोरक्षआसन गुरु गोरखनाथ के नाम पर है, मत्स्येन्द्रआसन मत्येंद्र नाथ पर है। मुद्रा और वंत की भी जब हम बात करते है तो वह भी नाथ पंथ से जुड़ा मिलता है। इस तरह नाथपंथ की परंपरा का वैश्विक स्तर पर महत्व है। अंत में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा नाथ पंथ की परंपरा और उसके महत्व को समझे इसके लिए विश्विद्यालय इनसाइक्लोपीडिया से इसे जोड़ने का प्रयास करे ताकि आज के युवा नाथपंथ के महत्व को पढ़े और जान सके। इस अवसर पर नाथ पंथ से जुड़े कई विद्वान और शोधार्थी शामिल हुए।