गुरुवार को इस मामले में कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया और कहा कि मुंबई की आर्थर रोड जेल उनके लिए ठीक रहेगी. तब तक नीरव मोदी को कस्टडी में रखा जाएगा. कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है.

काला जैकेट पहले नीरव मोदी कोर्टरूम में बेहद गंभीरता के साथ जज के सामने फ़ैसला सुनते दिखे.

जस्टिस सैमुअल गूज़ी ने कहा कि नीरव मोदी पर जो आरोप हैं उसके जवाब उन्हें भारत में देने चाहिए

जज ने कहा, “प्रथमदृष्टया ये मामला पैसों की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है.” कोर्ट ने भारतीय पक्ष की दलाली को माना और कहा कि इस मामले में गवाहों को बहकाया गया है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है.

जज ने कहा, “ऐसा नहीं लगता कि नीरव मोदी आत्महत्या करेंगे. कोर्ट को यकीन है कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो भी वो अपना पक्ष रख सकेंगे. ऐसा नहीं लगता कि उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाए तो उन्हें न्याय नहीं मिलेगा.”

भारत सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि जेल में उनकी सुरक्षा को लेकर कोर्ट आश्वस्त है.

कोर्ट ने कहा, “मुंबई के आर्थर रोड जेल का कमरा 12 (बैरक नंबर 12) उनके लिए ठीक है. ये एक बड़ा कमरा है जिसमें उन्हें एक बिस्तर, एक बाथरूम मिलेगा, कमरे में रोशनी भी आती है.”

“जेलों में अधिक संख्या में कैदियों के होने की बात कही जाती है लेकिन आर्थन रोड जेल का बैरक नंबर 12 बीस फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा है, इसमें पंखा लगा है और ट्यूबलाइटें भी हैं. यहां मच्छर न हों उसलिए सपात्ह में एक बार यहां दवा भी छिड़की जाती है.”

जज ने कहा, “अगस्त 2020 में जेल के जो वीडियो कोर्ट में पेश किए गए थे उनमें देखा जा सकता है कि वहां सफाई की और शौच की अच्छी व्यवस्था है.”

जज ने नीरव मोदी के मानसिक स्वास्थ्य की दलील को खारिज करते हुए कहा कि उनकी स्थिति में किसी भी व्यक्ति की मानसिक हालत ऐसी हो सकती है.

हालांकि कोर्ट ने कहा है कि इस आदेश के बाद भी नीरव मोदी चाहें तो यूके की कोर्ट में फिर से अपील कर सकते हैं. कोर्ट का कहना है कि उन पर लगे आरोपों की सुनवाई भारत में होनी चाहिए.छोड़िए YouTube

क्या है मामला?

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर लंदन की अदालत में साल 2019 से मामला चल रहा है.

पंजाब नेशनल बैंक से 14000 करोड़ रुपये के ग़बन के संबंध में सीबीआई और ईडी ने अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. सीबीआई ने नीरव मोदी के ख़िलाफ़ जो दो मामले दर्ज किए हैं उनमें नीरव मोदी की बहन पूर्वी मेहता और उनके पति मयंक मेहता को अभियुक्त नहीं बनाया गया है.

नीरव मोदी खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते हैं.

लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने दोनों को अभियुक्त बनाया है क्योंकि आरोप है कि इन दोनों के ज़रिये ही नीरव मोदी ने 12000 करोड़ रुपये तक की रक़म को ठिकाने लगाने में कामयाबी हासिल की है. मामले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय ने जो आरोप पत्र दायर किया उसमें मयंक मेहता को भी अभियुक्त बनाया गया है.

इससे पहले लंदन की वेंडज़वर्थ जेल में नीरव मोदी की बहन और बहनोई की ओर से सरकारी गवाह बनने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

नीरव मोदी की बहन और उनके पति ने क्षमा की प्रार्थना अदालत से की है और कहा है कि वो सरकारी गवाह बनना चाहते हैं. पूर्वी मेहता, हीरा कारोबारी नीरव मोदी की छोटी बहन हैं और वो बेल्जियम की नागरिक हैं जबकि उनके पति मयंक के पास ब्रितानी नागरिकता है.

पूर्वी और मयंक के वकील अमित देसाई के अनुसार दंपत्ति ने ख़ुद को नीरव मोदी की करतूतों से अलग कर लिया है. उनकी दलील है कि दोनों की निजी ज़िंदगी पर नीरव मोदी की करतूतों की वजह से बुरा असर पड़ा है.