लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सहकारिता विभाग में भर्ती घोटाले की बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया गया है. दरअसल राजकीय भंडार निगम को 1197 श्रमिकों को नियमित करने के लिए निगम को शासन का एक पत्र मिला. ये पत्र सहकारिता विभाग के अनु सचिव के नाम से जारी किया था. पहले के हस्ताक्षर मिलाए तो फर्जीवाड़ा सामने आया. जिसके बाद सीतापुर और फतेहपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है.

मिली जानकारी के अनुसार, बीते 18 जनवरी को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव के कैंप कार्यालय से भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोस्वामी के निजी सचिव को शासन की ओर एक पत्र मिला. सहकारिता विभाग से जारी हुए इस पत्र में ऑल इंडिया वेयर हाउसिंग कारपोरेशन इंप्लाइज यूनियन लखनऊ के राष्ट्रीय महामंत्री एसके पांडेय के दो पत्र जिसमें सीतापुर और फतेहपुर डीएम को भंडारण निगम में काम कर रहे श्रमिकों को नियमित करने की बात कही थी.

इसके बाद 19 जनवरी को राजकीय भंडार निगम को एसके पांडेय के दोनों पत्र और शासन से जारी पत्र के साथ 1197 श्रमिकों लिस्ट कार्यवाही के लिए भेजी गई. इस लिस्ट में फतेहपुर पक्के तालाब डिपो के 410, जहानाबाद के 67, रामकोट और नेरीकला के 360-360 नाम थे. शासन के इस पत्र को सहकारिता विभाग के एक अधिकारी अनु सचिव शैलेन्द्र कुमार के हस्ताक्षर थे. 

इसके बाद राजकीय भंडारण निगम ने पुराने पत्रों को निकाला और शैलेन्द्र कुमार के हस्ताक्षर मिलाए तो वो अलग पाए गए. इसके बाद 27 जनवरी को शासन का एक और पत्र आया. जिसमें दूसरे अधिकारी के हस्ताक्षर थे, उसको पुराने पत्रों से मिलाया तो वो भी अलग था. फर्जीवाड़ा का खुलासा होते ही निगम प्रबंधन ने एफआईआर दर्ज कराते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक को कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं.

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