किसानों और सरकार के बीच चल रही आठवें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। सरकार का कहना है कि 15 जनवरी को किसानों से फिर से बातचीत की जाएगी।

0बैठक में एक किसान नेता ने एक नोट बनाकर लिखा,मरेंगे या जीतेंगे।

किसानों और सरकार के बीच चल रही आठवें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। ये मीटिंग भी बेनतीजा रही है। सरकार का कहना है कि 15 जनवरी को किसानों से फिर से बातचीत की जाएगी। बता दें कि बैठक में एक किसान नेता ने एक नोट बनाकर लिखा,”मरेंगे या जीतेंगे”। सरकार और किसानों के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए आज कोशिश की गई लेकिन ऐसा हो नहीं सका। सरकार ने किसानों से कहा है कि ये कानून पूरे देश के लिए हैं। न सिर्फ पंजाब और हरियाणा के लिए। इस पर किसानों ने कहा कि अगर दूसरे राज्यों के किसानों को ये कानून चाहिए भी तो विधानसभा के जरिए वे लोग ये कानून ला सकते हैं।.html

सूत्रों की मानें तो सरकार के साथ मीटिंग में एक किसान ने कहा कि हमारी घर वापसी तभी मुमकिन है जब सरकार ये कानून वापिस ले। किसानों का कहना है कि किसानी पूरी तरह से राज्य सरकार का विषय है इसलिए इस मामले में केंद्र को दखल नहीं देना चाहिए।

किसानों ने कहा कि लगता है कि सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं चाहती है इसलिए इतने दिनों से सिर्फ बातचीत कर रही है। समाधान नहीं करना चाहती है। अगर आपको ऐसा ही करना है तो हम सबका समय न बर्बाद किया जाए। हमको सीधे-सीधे बता दिया जाए।ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉरडिनेशन कमेटी की एक सदस्य ने बताया कि सरकार ने किसानों से कहा है कि वह यह कानून वापिस नहीं ले सकती है।

मालूम हो कि सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित कराए गए कृषि कानूनों को लेकर किसान आक्रोशित हैं। किसानों का कहना है कि सरकार अगर ये कानून वापिस नहीं लेती है तो वे 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करेंगे।

आज मीटिंग में किसानों का प्रतिनिधित्व 40 किसान नेताओं ने किया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री तोमर समेत पीषूय गोयल और मंत्री सोम प्रकाश मौजूद रहे । सरकार का ये तर्क है कि अधिकतर किसान इस कानून के पक्ष में हैं।

इससे पहले पिछली बैठक 4 जनवरी को हुई थी जो कि गतिरोध तोड़ने में विफल रही थी। गुरुवार को, किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर ट्रैक्टर रैली निकाली और 26 जनवरी के लिए रिहर्सल की।

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