अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस 5208 बदमाशों का डोजियर तैयार कर रही है। गंभीर आपराधिक घटनाएं अंजाम देने और जरायमपेशे में शामिल इन बदमाशों में सबसे ज्यादा सहजनवा और शाहपुर थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं। पुलिस के आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इन दोनों क्षेत्रों में अपराध की नर्सरी तैयार हो रही है।

आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने और जरायमपेशे में शामिल बदमाशों को जेल पहुंचाने की शासन की मंशा को पुलिस के अधिकारियों ने भांप ली है। यही वजह है कि पुलिस के अधिकारियों द्वारा जिले में सक्रिय बदमाशों का डोजियर तैयार कराया जा रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिले के 5208 बदमाशों का डोजियर तैयार कराया जा रहा है। पुलिसकर्मियों द्वारा बदमाशों के बारे में 21 बिंदुओं पर सूचनाएं इकट्ठा की जा रही है। जिन 5208 बदमाशों का डोजियर तैयार हो रहा है, उनमें सबसे ज्यादा 924 बदमाश सहजनवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। दूसरे नम्बर पर शहर का शाहपुर थाना क्षेत्र है। शाहपुर पुलिस द्वारा 865 बदमाशों का डोजियर तैयार किया जा रहा है।

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक सबसे कम सिर्फ 6 बदमाशों का डोजियर राजघाट पुलिस को बनाना है जबकि 7 बदमाशों को डोजियर हरपुर बुदहट थाने की पुलिस बना रही है। कैंट, गोरखनाथ, बड़हलगंज, बेलीपार और खजनी पुलिस को 300 से अधिक बदमाशों का डोजियर तैयार करना है। पुलिस अधीक्षक अपराध ने जिले के सभी थानेदारों को इन बदमाशों का डोजियर शीघ्र तैयार करने के लिए कहा है। उन्होंने इस काम में हो रही देरी पर नाराजगी भी जाहिर की है।

महिला थाना क्षेत्र में शून्य है ऐसे बदमाशों की संख्या

पुलिस के अधिकारियों द्वारा जिले के सभी थानों को बदमाशों का डोजियर तैयार करने के लिए कहा गया है। बाकायदा सूची भी जारी की गई है। नव गठित थाना गीडा में 31 और रामगढ़ ताल क्षेत्र के 52 बदमाशों को डोजियर तैयार करना है। इस काम से महिला थाने की पुलिस मुक्त है। उसके जिम्में एक भी बदमाश नहीं हैं जिनका डोजियर बनाना हो।

डोजियर से पल भर में होगी बदमाशों की पहचान

बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अब ऑनलाइन डोजियर बनवा रही है। पुलिस मुख्यालय से बदमाशों के ऑनलाइन डोजियर बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मुख्यालय से थानों को ‘त्रिनेत्र’ कंप्यूटर एप मुहैया कराया गया है। इसी एप में ही शातिरों का डोजियर तैयार किया जा रहा है। थानों से बदमाशों का डोजियर बनाने के बाद उसे पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। बदमाशों के पकड़े जाने के बाद ऑनलाइन डोजियर के डाटाबेस से उसका मिलान किया जाएगा। इससे पलभर में बदमाश की वास्तविक पहचान और विभिन्न अपराध में जेल जाने की तिथियों समेत पूरे आपराधिक इतिहास की जानकारी पुलिस को मिल जाएगी। ऑनलाइन डोजियर बनने के बाद बदमाशों का काला चिट्ठा एक जनपद से दूसरे जनपद की पुलिस के पास भी पहुंच जाएगा।

एक जनवरी 2010 से 31 जुलाई 2020 पर नजर

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार ने एक जनवरी 2010 से 31 जुलाई 2020 के बीच गंभीर आपराधिक घटनाएं करने या आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने वाले बदमाशों पर विशेष नजर रखने को कहा है। एसएसपी ने इस अवधि में अपराध करने वालों का 21 बिंदुओं पर डोजियर बनाने को कहा है।

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