फर्जी ट्रांजिट लाइसेंस के जरिए नक्सलियों को असलहा सप्लाई होने के मामले में कलेक्ट्रेट के तत्कालीन असलहा लिपिक और वर्तमान में ईआरके (इंगलिश रिकार्ड कीपर) पर डीएम ने बड़ी कार्रवाई की है। डीएम ने उनको मूल वेतन पर करके उनके सभी प्रमोशन खत्म करके डिमोशन कर दिया है। एसीएम द्वितीय की जांच में लिपिक दोषी पाए गए थे। 

2016 एटीएस ने शहर के चार नामी गन हाउस मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि गन हाउस मालिकों ने नक्सलियों को असलहे बेचे थे। असलहा सप्लाई करने के लिए कानपुर कलेक्ट्रेट से फर्जी ट्रांजिट लाइसेंस जारी किया गया था। एटीएस ने तत्कालीन असलहा लिपिक महेश सिंह चौहान को आरोपी बनाया था। वह खुद कोर्ट के समक्ष सरेंडर होकर जेल गए थे।

शासन के आदेश पर डीएम ने महेश पर लगे आरोपों की जांच कराई। एसीएम द्वितीय अमित कुमार राठौर ने जांच करके रिपोर्ट डीएम को दी है। उसमे तत्कालीन असलहा लिपिक और वर्तमान में ईआरके महेश सिंह चौहान को दोषी ठहराकर कार्रवाई की संस्तुति की है। डीएम आलोक तिवारी ने बताया कि जांच  रिपोर्ट में ईआरके को दोषी माना गया है।शासन के आदेश पर गलत ट्रांजिट लाइसेंस बनने में कार्रवाई की गई है।  उनको मूल वेतन पर कर दिया गया है। उसके सभी प्रमोशन रद कर कर दिए गए हैं।