गोरखपुर, काशिफ अली। प्रदेश सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने शिया और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की बिक्री, खरीद और ट्रांसफर में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। गोरखपुर में भी बड़ी संख्या में वक्फ की संपत्तियां हैं और उसे ट्रांसफर करने या बेचने के दौरान नियमों की अनदेखी की गई है। कई वक्फ संपत्तियों पर मुतवल्लियों ने बहुमंजिली इमारतों का निर्माण कराकर अपने रिश्तेदारों को 99 साल के लीज पर दे दिया है। शिकायतों के बावजूद ऐसा करने वालों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ा तो उसके जद में गोरखपुर के भी कई लोग आएंगे। अनुमान के मुताबिक गोरखपुर एवं आसपास के जिलों में वक्फ की दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। दो वर्ष पूर्व सेंट्रल वक्फ कौंसिल, नई दिल्ली के सदस्स सैयद एजाज अब्बास ने भी जून 2017 मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गोरखपुर में वक्फ संपत्तियों की सीबीाआइ से जांच कराने की मांग की थी।

संपत्ति ठिकाने लगाने वालों की सूची होगी तैयार

शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला होगा जहां वक्फ की संपत्ति न हो, लेकिन दस्तावेजों में हेरफेर कर वक्फ की सैकड़ों संपत्तियां बेची जा चुकी है। वक्फ में दर्ज संपत्तियों को सरकारी दस्तावेजों ममें बतौर वक्फ दर्ज कराने के साथ-साथ नगर पालिका या नगर निगम के संपत्ति रजिस्टर में भी दर्ज कराना होता है, लेकिन वक्फ संपत्तियों की देखरेख का जिम्मा लेने वाले कई मुतवल्लियों ने सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नहीं कराया जिससे उन्हें खुर्द-बुर्द करने में आसानी हो गई। कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें मुतवल्ली ने वक्फ संपत्तियों को अभिलेखों में रिश्तेदारों के नाम दर्ज कराकर उसे बेच दिया। इस तरह की दर्जनों शिकायतों को जिला प्रशासन एवं जिला अप्लसंख्यक कल्याण विभाग ने कार्रवाई के लिए सुन्नी व शिया वक्फ बोर्ड भेजा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। यह माना जाता है कि ऐसे मामलों में वक्फ बोर्ड के सदस्यों की भी मिलीभगत होती है। 

गोरखपुर आ सकती है सीबीआइ की टीम

वहीं तमाम वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जे हैं तो कुछ पर बनी दुकानों का कोई लेखा-जोखा नहीं है। सिर्फ बेतियाहाता में सौ करोड़ से ज्यादा मूल्य की वक्फ संपत्तियों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर ऊंची-ऊंची इमारतें बना ली हैं। सीबीआइ जांच की शुरुआती दो दिनों में लखऊन में दर्ज मुकदमे के बाद यहां भी खलबली मच गई है। प्रशासनिक सूत्राें के मुताबिक सीबीआइ की टीम यहां भी आ सकती है। इसे लेकर प्रशासन एलर्ट मोड में आ गया है। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर वक्फ की संपत्तियों के दस्तावेज सहेजे जा रहे हैं।

बेची नहीं जा सकती वक्फ की संपत्तियां

एक बार यदि कोई संपत्ति का वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत हो गई तो फिर उसे बेचने का अधिकार किसी को नहीं है, बशर्ते किसी सक्षम न्यायालय से इस बार में कोई आदेश पारित न हो। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को वक्फ संपत्ति नहीं होने की घोषणा करने का अधिकार भी नहीं है।

गोरखपुर में 1392 वक्फ संपत्तियां

गोरखपुर में 1392 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें मकान, दुकान, जमीन, काम्पलेक्स, कब्रिस्तान व तकिया, मस्जिद, कर्बला, दरगाह एवं इमामचौक शामिल है।

इन इलाकों में वक्फ संपत्तियां

हजारीपुर, पुर्दिलपुर, दिलेजाकपुर, अलीनगर, बेनीगंज, सिधारीपुर, रसूलुपर, गोरखनाथ, सिविल लाइंस, गोलघर, बेतियाहाता, कालेपुर, शाहमारुफ, उर्दू बाजार, मियां बाजार, दीवान बाजार, बक्शीपुर, सिनेमा रोड, बैंक राेड, मुफ्तीपुर, हांसूपर, विंध्वासिनी नगर, नियामतचक, शेखपुर, बसंतपुर, घंटाघर, नखास, रेती, नथमलपुर, इलाहीबाग, मोहरीपुर, कुसम्ही, चौरीचौरा, पिपराइच, छोटे काजीपुर के अलावा निचलौल, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज और सिद्धार्थनगर में भी वक्फ की करोड़ों रुपये की संपत्ति है।

गोरखपुर की प्रमुख वक्फ

जामा मस्जिद, उर्दू बाजार

अंजुमन इस्लामियां, खूनीपुर

इमामबाड़ा इस्टेट, मियां बाजार

जाहिद अली सब्जपोश, जाफरा बाजार

हमीदिया यतीमखाना, जाफरा बाजार कर्बला

रानी अशरफुल निशा खानम, बसंतपुर