सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बार फिर से दोहराया कि वह सेना या सशत्र बलों में पोस्टिंग से संबंधित मामलों में दखल नहीं देता है। शीर्घ अदालत ने कहा कि यह सही है कि लद्दाख, अंडमान व निकोबार व पूर्वोत्तर राज्य आदि कठिन क्षेत्र हैं, लेकिन किसी न किसी को तो वहां तैनात करना ही होगा।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता कर्नल से कहा, ‘आपको अपनी पोस्टिंग को लेकर शिकायत हो सकती है, लेकिन सेना में पोस्टिंग एक ऐसा मसला है जिस पर हम दखल नहीं देते। लद्दाख, अंडमान-निकोबार, पूर्वोत्तर राज्य कठिन इलाके हैं, लेकिन वहां भी किसी न किसी को तो तैनात करना होगा।’
पीठ ने यह भी कहा कि हम आपकी कठिनाई समझने हैं, लेकिन हम सेना की पोस्टिंग मामले में दखल नहीं देते। वास्तव में याचिकाकर्ता कर्नल का तबादला जोधपुर से अंडमान-निकोबार कर दिया गया है। उनकी पत्नी भी कर्नल हैं जिनकी पोस्टिंग भटिंडा में है।

तबादला अंडमान-निकोबार किए जाने से नाखुश कर्नल ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन याचिका खारिज हो गई थी। हाईकोर्ट ने उन्हें 15 दिनों के भीतर अंडमान-निकोबार जाकर कार्य संभालने के लिए कहा था।

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी भटिंडा में है और भटिंडा से अंडमान और निकोबार की दूरी 3500 किलोमीटर से अधिक है। उन्होंने कहा कि उनका साढ़े चार साल का बच्चा भी है। कुमार ने कहा कि इस तबादले की वजह से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सैन्य अधिकारी के साथ प्रताड़ना है। इस पर पीठ ने कहा कि यह कठोर है, लेकिन किसी न किसी को अंडमान व निकोबार तो जाना होगा। पीठ का रुख देखते हुए वकील ने याचिका वापस ले ली।

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