भारी बारिश से खरीफ की फसल और रबी के स्टॉक को नुकसान, अक्टूबर तक 100 रुपए किलो तक पहुंच सकते हैं प्याज के दाम

भारी बारिश से खरीफ की फसल और रबी के स्टॉक को नुकसान, अक्टूबर तक 100 रुपए किलो तक पहुंच सकते हैं प्याज के दाम

पिछले दो हफ्तों में भारत के कभी बाज़ारों में, प्याज की थोक और खुदरा क़ीमतें, दो गुना से अधिक हो गई हैं, जिसमें नासिक की सबसे बड़ी प्याज मंडी भी शामिल है.

नई दिल्ली: देश के बहुत से हिस्सों में खुदरा और थोक बाज़ारों में प्याज के दामों में तेज़ी से उछाल देखा जा रहा है, क्योंकि मॉनसून की भारी बारिश ने कुछ राज्यों में फसल को नुक़सान पहुंचाया है, जबकि कुछ दूसरे राज्यों में स्टोर करके रखी चीज़ों की क्वालिटी प्रभावित हुई है.

व्यापारियों के अनुसार दो दक्षिणी राज्यों- आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में शुरू ख़रीफ की प्याज़ की फसल, जो जुलाई-सितम्बर के बीच पूरे देश में सप्लाई की जाती है, लगातार बारिशों के चलते खेलों में पानी भर जाने से, बुरी तरह ख़राब हो गई है.

दिप्रिंट ने जिन व्यापारियों से बात की उनका कहना था कि दूसरे प्रमुख प्याज़ उत्पादक राज्यों- गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी, जहां इस साल के शुरू में रबी की बंपर पैदावार जमा करके रखी गई थी. उसकी क्वालिटी भी बारिश से ख़राब हुई है.

बाज़ारों से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि इसके नतीजे में पिछले दो हफ्तों में देश के बहुत से बाज़ारों और प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में प्याज के दाम दोगुने से अधिक बढ़ गए हैं.

मुम्बई और कोलकाता में खुदरा क़ीमतें 50 रुपए प्रति किलो और दिल्ली में 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो कुछ समय पहले तक, 20 रुपए से कुछ अधिक थीं. इसी तरह देश की सबसे बड़ी थोक प्याज मंडी- नासिक के लासलगांव में भी, थोक क़ीमतें 28 अगस्त के 12 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 8 सितंबर को 29 रुपए प्रति किलो पहुंच गईं

दिल्ली में आज़ादपुर मंडी- जो राजधानी और पड़ोसी राज्यों को पूर्ति करने वाली एशिया की सबसे बड़ी सब्ज़ी व फल मंडी है. प्याज के दामों में तेज़ी से उछाल आया है, जबकि सप्लाई घटकर लगभग आधी रह गई है. 9 सितंबर को आज़ादपुर में थोक भाव 23 रुपए प्रति किलो था और कुल सप्लाई 628 टन थी. जबकि 27 अगस्त को ये दाम 8 रुपए प्रति किलो थे, और मार्केट में कुल सप्लाई 1,069 टन थी.

बहुत व्यापारियों का कहना था, कि अगले महीने क़ीमतें उछलकर, 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना है.

नवम्बर में नई फसल आने की उम्मीद

आज़ादपुर मंडी में प्याज और लहसुन के एक थोक व्यापारी, बुद्धि राजा सिंह ने कहा, ‘प्याज के दामों में ये बढ़ोतरी इसकी सप्लाई में कमी, और अधिक बारिशों की वजह से है. तीन प्रमुख प्याज़ उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जमा करके रखी गई प्याज भी ख़राब हुई है.’



सिंह ने कहा कि खुदरा क़ीमतें ‘अक्तूबर में 100 रुपए किलो तक पहुंच सकती हैं, क्योंकि नई फसल के नवम्बर में ही आने की उम्मीद है.’

सिंह ने आगे कहा, ‘फिलहाल, बाज़ार में आने वाली प्याज बहुत अच्छी क्वालिटी की नहीं है, जिसकी वजह से अच्छी क्वालिटी की प्याज़ आकर्षित करने के लिए भी दाम बढ़ रहे हैं. पहले मंडी में हर रोज़ ए-ग्रेड की 250-300 टन प्याज आती थी, लेकिन अगस्त के आख़िर से ये घटकर 50-70 टन रह गई है.’

क़ीमतों में इज़ाफे का एक कारण ये भी बताया जा रहा है कि प्रमुख प्याज़ उत्पादक राज्यों के थोक बाज़ारों में अगस्त में हुई भारी बारिशों की वजह से सप्लाई चेन भी बाधित हुई है.

महाराष्ट्र में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) के निदेशक, नाना साहेब पाटिल ने कहा, ‘अगस्त के मध्य में सतारा, पुणे और नाशिक में भारी बारिश से स्टोर करके रखी गई प्याज़ में नमी आ गई. जिससे उसकी क्वालिटी ख़राब हो गई है. पूरे महाराष्ट्र में किसान शिकायत कर रहे हैं, कि जमा करके रखी हुई उनकी 30-35 प्रतिशत प्याज़ ख़राब हो गई है.’

पाटिल ने ये भी कहा, ‘शुरू ख़रीफ की प्याज की फसल, जो अब तक बाज़ार में आ जानी चाहिए थी. उसे नुक़सान पहुंचा है और उसके बाज़ार आने में देरी हुई है. फिलहाल केवल वो किसान जिनमें फसल को रोककर रखने की क्षमता है, और वो व्यापारी जिन्होंने प्याज़ जमा करके रखी हुई है. प्याज़ को रुक रुक कर बाज़ार में उतार रहे हैं, जिसकी वजह से दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं.’



जैसा कि जुलाई में ख़बर दी गई थी, नेफेड अभी तक बफर स्टॉक के लिए केवल 45,000 मीट्रिक टन (एमटी) प्याज़ ही ख़रीद पाई है, जबकि इस साल का लक्ष्य 1,00,000 एमटी का था.

बफर स्टॉक दोहरा काम करता है. प्याज उत्पादन कम होने की स्थिति में ये क़ीमतों को स्थिर रखता है और मांग कम होने से क़ीमतें घटने की सूरत में इसकी ख़रीद से किसानों को भी अपनी उपज के बेहतर दाम मिल जाते हैं.

लासलगांव थोक बाज़ार में प्याज के एक कमीशन एजेंट, सूरज काले ने कहा, ‘थोक क़ीमतें पहले ही 30 रुपए प्रति किलो पहुंच गईं हैं और आने वाले त्योहार सीज़न में बढ़कर 60-70 रुपए प्रति किलो पहुंच जाएंगी. चूंकि नई फसल नवम्बर के मध्य तक ही बाज़ार में आ पाएगी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘खुदरा क़ीमतें आमतौर से थोक क़ीमतों का दोगुना होती हैं. इसलिए महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पाद क्षेत्रों को छोड़कर, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल जैसे उपभोग के प्रमुख राज्यों में प्याज की खुदरा क़ीमतें 100-110 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं.’

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