गोरखपुर, ईज ऑफ डूइंग यानी प्रक्रिया को आसान करने के मामले में उत्तर प्रदेश के प्रयासों का असर दिखने लगा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में प्रदेश ने 10 पायदान की छलांग लगाकर दूसरे नंबर पर स्वयं को स्थापित करने में कामयाबी पाई है। निश्चित रूप से शासन स्तर से नियमों में किए गए बदलाव का इसमें बड़ा रोल है लेकिन स्थानीय स्तर पर भी उन नियमाें के अनुपालन में तेजी दिखाई गई, जिससे उद्यमियों की राह आसान हुई और निवेश के लिए उनका भरोसा बढ़ा है।

बड़ी कंपनियां कर रहीं संपर्क

गीडा में कोका कोला की ओर से करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बॉटलिंग प्लांट लगाने की इच्छा जताई गई है। 50 करोड़ रुपये की लागत से क्रॉकरी का फैक्ट्री लगाई जानी है। इन कंपनियों ने गोरखपुर में उद्योग लगाने का फैसला यूं नहीं किया। यहां के बदले माहौल ने उन्हें यहां इकाई स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है। गीडा में जब उनकी ओर से संपर्क किया गया तो यहां से मिले रिस्पांस ने उनकी इच्छा को और मजबूत कर दिया। प्राधिकरण की ओर से बिना देर किए ही उन्हें जमीन दिखा दी गई। यहां की अग्रणी कंपनी गैलेंट इस्पात लिमिटेड की ओर से विस्तार व नई सीमेंट फैक्ट्री का प्रस्ताव दिया गया तो गीडा प्रबंधन जमीन उपलब्ध कराने में जुट गया।

एमओयू करने वालों को मिली सफलता

करीब एक दर्जन उद्यमियों की ओर से गोरखपुर में नई फैक्ट्री लगाने व विस्तार के लिए सरकार के साथ एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किया गया था। उनमें से 85 फीसद से अधिक को भूखंड उपलब्ध करा दिया गया है, शेष का प्रक्रिया चल रही है।

ये हैं बदलाव के महत्वपूर्ण कारणशासन स्तर पर निवेश मित्र पोर्टल पर एक बार आवेदन करिए, वहीं से फायर, बिजली, श्रम जैसे सभी विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल जाएंगे। हर जगह दौड़ने की जरूरत नहीं। गीडा में उद्योग लगाने के लिए करीब 32 लोगों ने एमओयू किया था जिनमें से करीब 85 फीसद को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। कई आवेदन के प्रारूप को सरल बनाया गया है ताकि निवेशकों को किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े। गीडा में निवेश करने के इच्छुक लोगों को भी जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में 68 लोगों को भूखंड दिए गए हैं। औद्यागिक इकाइयों के लिए जमीन क्रय की व्यवस्था प्रशासन के पास होने से देरी होती थी, अब गीडा ने यह व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है और जरूरत के अनुसार सीधे किसान से बात कर जमीन क्रय की जा रही है। किसी भी समस्या की सुनवाई कर उसका तेजी से निस्तारण किया जा रहा है।

हाल में होने वाले बड़े निवेश

गैलेंट समूह गीडा में 865 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। जमीन खरीद की प्रक्रिया चल रही है। अंकुर उद्योग की ओर से 300 करोड़ रुपये के निवेश से स्टील फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। कोका कोला की ओर से बॉटलिंग प्लांट लगाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव। 50 करोड़ की लागत से क्रॉकरी की फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव। एमएसएमई स्तर की कई अन्य औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने का प्रस्ताव। गीडा में कुल उद्योग : करीब 465

निश्चित रूप से प्रदेश सरकार ने औद्योगिक इकाई लगाने की स्थिति को बेहतर बनाया है। निवेश मित्र के जरिए सिंगल विंडो की अवधारणा शुरू की और इसे हर शहर में ठीक से लागू किया गया। एक ही जगह हर तरह की अनापत्ति मिल जा रही है। विभागों में दौड़ने से उद्यमी बच गए हैं। अब 72 घंटे में उद्योग लगाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव भी पास किया गया है, यह भी बड़ा कदम है। उम्मीद है कि प्रदेश जल्द ही इस मामले में एक नंबर पर होगा। – एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज

निश्चित रूप से प्रदेश सरकार ने औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। निवेश मित्र पोर्टल अपने आप में सबसे बड़ा बदलाव है। यदि कागज सही हैं तो 10 दिन में निस्तारण हो जाना है। कोई आवेदन को लटकाने की स्थिति में नहीं है। एक ही जगह हर तरह की अनापत्तियां मिल जाती हैं। स्थानीय प्राधिकरण का भी पूरा सहयोग है। इसके साथ ही अलग-अलग ट्रेड के अनुसार छूट की योजना ने भी प्राेत्साहित किया है। – निखिल जालान, अंकुर उद्योग

सरकार की ओर से निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। प्राधिकरण के स्तर से भी किसी उद्यमी को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाती है। जल्द से जल्द मामले का निस्तारण करने का प्रयास होता है। उसी का असर है कि यहां निवेश के लिए लोगों की रुचि बढ़ी है। – संजीव रंजन, सीईओ गीडा

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