भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर तनाव अपने चरम पर है। दोनों ही देशों की सेनाएं पिछले चार महीने से आपस में उलझी हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर की बातचीत भी हुई है। हालांकि, चीन ने अपनी ओर से माहौल को ठंडा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। बल्कि आक्रामक रवैया अपनाते हुए सेनाओं को न सिर्फ कब्जे वाले इलाकों पर तैनात रखा है, बल्कि सैनिकों की संख्या में भी इजाफा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हुई खूनी झड़प के बाद से एलएसी पर सैनिकों की संख्या 60 फीसदी तक बढ़ा चुका है।

चीन मामलों के जानकार कहते हैं कि चीनी सेना की एलएसी पर यह आक्रामकता नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तक जारी रह सकती है। चीन ने गलवान से लेकर पैंगोंग सो तक के इलाके का घेराव ही भारत को अमेरिका से करीबी संबंध रखने की सजा के मकसद से किया। हालांकि, भारत के पलटवार के बाद स्थितियां विपरीत हुई हैं। लद्दाख में अक्टूबर के बाद वैसे भी मौसम बेहद खराब हो जाता है। ऐसे में अगले महीने से दोनों सेनाओं के लिए कम तापमान युद्ध से भी बड़ी चुनौती होगा। भारत ने तब तक के लिए अपनी सेना को पीएलए का आमना-सामना करने के लिए तैनात किया है।

भारत ने भी एलएसी पर बढ़ाई चौकसी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के फाइटर जेट्स हर कुछ घंटे में लेह से उड़ान भर रहे हैं, ताकि चीन की किसी भी हरकत पर करीब से नजर रखी जा सके। बता दें कि चीनी रक्षा मंत्री की ओर से बैठक में एलएसी पर तनाव के लिए पूरी जिम्मेदारी भारत पर डाल दी गई थी। राजनाथ सिंह ने भी साफ किया था कि भारतीय सेना अपनी क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्प है।

दोनों देशों के तनाव के बीच साफ है कि चीन ने भारत की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी। भारत ने बेहद खुफिया अंदाज में पहले पैंगोंग सो में रेजांग ला के नजदीक चुसुल की चोटियों पर कब्जा किया, जिससे चीन के सैन्य ठिकानों पर नजर रखने में मदद मिल रही है। अब हाल ही में भारत सरकार ने चीन की सैकड़ों ऐप को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर उन्हें बैन कर दिया है। इससे चीन के व्यापारियों को भी भारी नुकसान हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *