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महामारी ने भारत की अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.राजस्व घाटा बढ़कर 88.52 अरब डॉलर हो गया है.

कोरोना वायरस की महामारी ने भारत की अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. भारत का राजस्व घाटा जून तक पिछले तीन महीने में बढ़कर 88.52 अरब डॉलर हो गया है.

अर्थशास्त्रियों ने अप्रैल में शुरू हुए 2020/21 वित्तीय वर्ष में भारत के राजस्व घाटे का अनुमान जीडीपी का 7.5% लगाया था. इससे पहले सरकार का अनुमान 3.5% था. रॉयटर्स पोल में इस वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में 5.1% की गिरावट का अनुमान लगाया गया है.

इसी पोल में कहा गया है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो यह गिरावट 9.1% तक जा सकती है. यह 1979 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बदतर हालत होगी. शुक्रवार को सरकार की तरफ़ से जारी आँकड़ों के मुताबिक़ जून तक पिछले तीन महीने में कुल संघीय टैक्स वसूली में एक साल पहले की तुलना में 46 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

रक़म के रूप में यह गिरावट 18.05 अरब डॉलर है. ऐसा तब है जब सरकार तेल पर टैक्स लगातार बढ़ाती रही है. भारत में अभी कोरोना से 16 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 35,747 लोगों की मौत हो चुकी है. पिछले तीन महीनों में सरकार का खर्च 13% बढ़कर 8.16 ट्रिलियन रुपया हो गया है जो कि एक साल पहले 7.22 ट्रिलियन रुपया था.

सरकार का खर्च मुफ़्त में अनाज और ग्रामीण रोज़गार पर बढ़ा है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दो महीने के लॉकडाउन के कारण एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में टैक्स वसूली में भारी गिरावट आई है. ऐसे में सरकार सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर राजस्व जुटाने की कोशिश कर रही है..

उधर भारत की टॉप रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के जून की तिमाही की कमाई में 47 फ़ीसदी की गिरावट आई है. कोरोना वायरस के कारण तेल की मांग में भारी कमी आई है. पहली तिमाही में भी इसकी कमाई में 41% की गिरावट आई थी.

कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनिया भर में लॉकडाउन लगा और इसके कारण तेल की मांग में भारी कमी आई है. आईओसी की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर लागू लॉकडाउन के कारण बिक्री बुरी तरह से प्रभावित हुई थी. प्लांट की पूरी क्षमता का भी इस्तेमाल नहीं हो पाया.

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