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ज्यादा पैसे की परेशानी:बैंकिंग सिस्टम में 8 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है, कर्ज की मांग नहीं होने से बढ़ी दिक्कत

वित्त वर्ष 2021 में 80 अरब डॉलर की शुद्ध फॉरेक्स खरीद से सिस्टम में 6 ट्रिलियन रुपए का लिक्विडिटी इंजेक्श byन होगा, जो पहले से ही वित्त वर्ष की शुरुआत से ही रिकॉर्ड सरप्लस में चल रहा है

  • विश्लेषकों के मुताबिक अतिरिक्त पैसा इतनी आसानी से बैंकिंग सिस्टम से नहीं निकलेगा
  • रिजर्व बैंक द्वारा फरवरी से कुल 9.57 लाख करोड़ रुपए के लिक्विडिटी के उपाय किए गए हैं

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयासों से 8 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी आ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यह नकदी इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है। क्योंकि अभी भी कर्ज की मांग में तेजी नहीं दिख रही है।

आरबीआई के प्रयासों से बढ़ी लिक्विडिटी

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत को लगातार दबाया गया है। इस तरह के आरबीआई के प्रयासों ने बैंकिंग सिस्टम में 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त नकदी को उत्पन्न किया है। विश्लेषकों के मुताबिक अतिरिक्त पैसा इतनी आसानी से बैंकिंग सिस्टम से नहीं निकलेगा। मांग और क्रेडिट ग्रोथ में मंदी, पेमेंट में  सकारात्मक बैलेंस और तीन साल पहले आरबीआई द्वारा नकदी को नियंत्रित करने के सबक से पता चलता है कि नकदी की यह राशि अगले कुछ महीनों के लिए न्यू नॉर्मल हो जाएगी।

यह लिक्विडिटी अगले 6 महीने तक रह सकती है 

साउथ इंडियन बैंक में ट्रेजरी विभाग में डेप्यूटी जनरल मैनेजर रितेश भुसारी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह लिक्विडिटी जल्दबाजी में दूर हो रही है। “नोटबंदी के विपरीत, जो एक आर्थिक नीति के फैसले का नतीजा था, अतिरिक्त लिक्विडिटी इस बार आरबीआई का क्रिएशन है। यह अगले छह महीने तक रह सकता है। रिजर्व बैंक द्वारा फरवरी से कुल 9.57 लाख करोड़ रुपए या सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.7% तक लिक्विडिटी के उपाय किए गए हैं। इससे मई में 8 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी बैंकों में आ गई।

यह स्थिति 2016 की तरह है 

लिक्विडिटी का यह मुद्दा आरबीआई को इस महीने तब ध्यान में आया जब गवर्नर शक्तिकांत दास ने पहली बार असाधारण मौद्रिक प्रोत्साहन (extraordinary monetary stimulus) से बाहर निकलने के लिए सावधानीपूर्वक रणनीति की जरूरत के बारे में बताया। संदेह मिटाने के लिए उन्होंने साफ कर दिया था कि यह जल्द होने वाला नहीं है। यह स्थिति 2016 से मिलती जुलती है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक नोटबंदी कर दिए जाने से देशभर के सभी बैंकों में अपार पैसा जमा हो गया।

2017 में आरबीआई ने बांन्ड्स की खुले बाजार में बिक्री की 

2017 में नकदी बढ़ने के साथ ही आरबीआई ने बॉन्ड्स की खुले बाजार में बिक्री शुरू की, जिससे करीब 90,000 करोड़ रुपए की कमी हुई। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स को फिस्कल 2021 में पेमेंट बैलेंस पर रिकॉर्ड 95 अरब डॉलर सरप्लस की उम्मीद है। यह काफी हद तक विदेशी मुद्रा खरीद से पूरा किया जाएगा ताकि रुपए को आगे बढ़ने से रोका जा सके। ब्लूमबर्ग में भारत के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में 80 अरब डॉलर की शुद्ध फॉरेक्स खरीद से सिस्टम में 6 ट्रिलियन रुपए का लिक्विडिटी इंजेक्शन होगा, जो पहले से ही वित्त वर्ष की शुरुआत से ही रिकॉर्ड सरप्लस में चल रहा है।

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