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बच्‍चों के आहार में कैसे शामिल करें कद्दू

बच्‍चे ही नहीं बल्कि बड़े भी कद्दू का नाम सुनकर मुंह बना लेते हैं जबकि कद्दू एक पौष्टिक सब्‍जी है जिसे खाने से स्‍वास्‍थ्‍य को अनेक लाभ मिलते हैं।

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दांत आने पर बच्‍चे ठोस आहार को चबाना शुरू करते हैं। शिशु को पौष्टिक फल और सब्जियां खिलाने का यह सबसे सही समय होता है। कद्दू एक ऐसी सब्‍जी है जिसमें अनेक पोषक तत्‍व होते हैं और ये बीटा कैरोटीन से युक्‍त होती है।

यहां जानिए कि बच्‍चों को कद्दू खिलाने के क्‍या फायदे होते हैं और किस तरह उनकी डायट में कद्दू को शामिल कर सकते हैं।

शिशु को कब खिलाएं कद्दू
शिशु के 6 महीने के होने के बाद आप उसे ठोस आहार खिलाना शुरू कर सकते हैं। आप कद्दू को उबाल कर, रोस्‍ट कर, स्‍टीम या ग्रिल कर के कद्दू खिला सकते हैं। लेकिन बच्‍चों को कद्दू के बीज न खिलाएं क्‍योंकि इससे उन्‍हें एलर्जी हो सकती है।

गुणों की खान है कद्दू, सेहत से लेकर स्किन के लिए फायदेमंद

गुणों की खान है कद्दू, सेहत से लेकर स्किन के लिए फायदेमंद

कद्दू का नाम सुनते ही कई लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं क्योंकि उन्हें इसका स्वाद पसंद नहीं आता। लेकिन इसे सब्जी के अलावा मिठाई, हलवा या फिर स्नैक्स के रूप में बनाकर खाया जाए, तो स्वाद कभी भूल नहीं पाएंगे। कद्दू में पोटैशियम, बीटा कैरोटिन, विटमिन ए, विटमिन के, फाइबर समेत कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। आइए जानते हैं सेहत के लिए इसके क्या फायदे हैं: (फोटो-getty)

  • वजन कम करने में मददगारकद्दू में काफी कम कैलरी होती हैं और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, इसलिए इसे वजन घटाने में सहायक माना जाता है। जो लोग बढ़ते वजन से परेशान हैं वे कद्दू को किसी भी फॉर्म में अपने डेली डायट में शामिल करें।
  • प्रोस्टेट कैंसर से बचावकद्दू में कैरोटीनॉयड्स और जिंक पर्याप्त मात्रा में होता है जो कलेस्ट्रॉल तो कम करते ही हैं साथ ही प्रोस्टेट कैंसर से भी बचाव करते हैं।
  • आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता हैआंखों की रोशनी को बढ़ाने में भी कद्द काफी मदद करता है। इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीनॉयड और ल्यूटिन आंखों की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।
  • हेल्दी स्किन के लिए जरूरी कद्दूकदद् स्किन को भी हेल्दी रखने में मदद करता है। इसमें विटमिन ई और सी होता है जो साथ में मिलकर एक ऐंटी-ऑक्सिडेंट के रूप में काम करते हैं और स्किन को सूरज की खतरनाक किरणों से बचाते हैं।
  • स्पर्म काउंट बढ़ाने में करता है मददकद्दू के अलावा इसके बीज भी काफी लाभकारी होते हैं। इनमें जिंक होता है जोकि स्पर्म के काउंट को बढ़ाने में मदद करता है। एक स्टडी के मुताबिक, कद्दू के बीज लिबिडो को बूस्ट करने में मदद करते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी ऐसिड्स होते हैं जोकि प्रोस्टाग्लैंडिन्स नाम के हॉर्मोन जैसे तत्वों को ऐक्टिव करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ये पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी को भी दूर करते हैं। (फोटो-getty)
  • भ्रूण के विकास में मददकद्दू प्रेगनेंट महिलाओं के लिए भी गुणकारी है, खासकर इसके बीज। कद्दू के बीज में नॉन हीम आयरन होता है, जो भ्रूण के विकास में मदद करता है।

कद्दू खाने के फायदे
कद्दू विटामिन ए से भरपूर होता है जो कि आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत जरूरी होता है। इसमें कैरोटीनॉयड होते हैं जो आंखों से जुड़ी कई समस्‍याओं और बीमारियों का खतरा भी कम कर देते हैं। ये कैरोटीनॉइड्स बच्‍चों और वयस्‍कों में मैकुलर डिजेनरेशन को कम करने में मदद करते हैं।

इम्‍यून सिस्‍ट मजबूत होता है
कद्दू में उच्‍च मात्रा में विटामिन सी और बायो-केमिकल्‍स होते हैं जो शिशु को जुकाम और फ्लू से बचाते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो शिशु की इम्‍युनिटी में सुधार लाते हैं। कद्दू एनर्जी से भरपूर होता है। एक कप कद्दू में प्रचुरता में पोटैशियम होता है जो खून में इलेक्‍ट्रोलाइट के संतुलन में सुधार लाता है और मांसपेशियों के कार्य में सुधार आता है।

​घर पर च्यवनप्राश कैसे बनाएं

  • ​घर पर च्यवनप्राश कैसे बनाएंच्‍यवनप्राश बनाने में 40 मिनट का समय लगेगा और ये च्‍यवनप्राश आप 10 महीने से अधिक उम्र के बच्‍चे को खिला सकते हैं।च्‍यवनप्राश बनाने के लिए आपको आधा किलो आंवला, एक कप गुड़, 5 चम्‍मच घी, मुट्ठीभर किशमिश (बिना बीज के) और 11 से 12 मुलायम खजूर (बिना बीज के) जरूरत होगी।मसाले के लिए 6 से 8 हरी इलायची, 9 से 10 काली मिर्च के दाने, एक चम्‍मच दालचीनी पाउडर, एक चम्‍मच सौंफ, तीन-चार केसर के टुकड़े, आधा चक्र फूल (स्‍टार अनीस), एक चम्‍मच जीरा और 8 से 9 लौंग लें।इस सामग्री से आप 100 ग्राम च्‍यवनप्राश बना सकते हैं।
  • ​च्यवनप्राश बनाने का तरीका बताएंसबसे पहले आंवले को धो लें और तेज आंच पर प्रेशर कुकर में दो सीटी लगाकर आंवले को उबाल लें। ठंडा होने पर पानी को एक कटोरे में छान लें और उसमें किशमिश और खजूर डालकर 10 मिनट तक छोड़ दें।इसके बाद आांवले, किशमिश और खजूर को मिक्‍सी में पीसकर पेस्‍ट तैयार कर लें। अब एक पैन लें और उसमें थोड़ा घी डालकर आंवले का पेस्‍ट डालें। इसे 10 मिनट तक पकाएं, जब तक कि घी अलग न होने लगे।इसके बाद पेस्‍ट में गुड़ डालकर 5 मिनट तक पकाएं। अब मसाले डाल दे। अगर स्‍वाद मीठे की बजाय खट्टा लग रहा है तो थोड़ा और गुड़ डाल दें।अब धीमी आंच पर इसे थोड़ा चिपचिपा होने तक पकने दें। इसके बाद इसे ठंडा कर लें और फिर एयर टाइट कंटेनर में भर कर फ्रिज में रख दें।यह भी पढ़ें : बच्‍चों को घर पर बनाकर खिलाएं बादाम का पाउडर, सेहत होगी दुरुस्‍त
  • ​च्यवनप्राश कब खाना चाहिएदिन में किसी भी समय या एक गिलास दूध के साथ एक चम्‍मच च्‍यवनप्राश खाएं। वैसे च्‍यवनप्राश खाने का सही समय सुबह नाश्‍ते से पहले और रात को खाने से पहले होता है। सुबह एक गिलास गुनगुने दूध के साथ च्‍यवनप्राश खिलाएं और रात को एक कप गुनगुने दूध के साथ एक चम्‍मच च्‍यवनप्राश खिला सकते हैं।फ्रिज में रखने पर ये च्‍यवनप्राश दो महीने तक चल सकता है। चूंकि, आपने च्‍यवनप्राश में गुड़ डाला है इसलिए मिठास बढ़ाने के लिए शहद का इस्‍तेमाल न करें।यह भी पढ़ें : शिशु के आहार में इस तरह शामिल करें अनानास
  • ​च्यवनप्राश खाने के फायदेये च्‍यवनप्राश बच्‍चों के लिए इम्‍युनिटी बढ़ाने का काम करेगा। इससे बच्‍चे बैक्‍टीरियल और फंगल संक्रमण से बचे रहेंगें। इसके सेवन से पाचन दुरुस्‍त रहेगा। बच्‍चों में कब्‍ज दूर करने के लिए गुनगुने पानी के साथ एक चम्‍मच च्‍यवनप्राश खिलाएं।यह भी पढ़ें : मां-बाप की नाक के नीचे बच्‍चे सीखते हैं ये बुरी आदतेंइसके अलावा च्‍यवनप्राश में मौजूद जरूरी पोषक तत्‍व याददाश्‍त को तेज करते हैं। च्‍यवनप्राश के नियमित सेवन से बच्‍चों का मस्तिष्‍क के कार्यों में सुधार आता है। इससे बच्‍चों को एनर्जी भी मिलती है।

अच्‍छी नींद आती है
अक्‍सर शिशु को रात के समय नींद नहीं आती है जो पैरेंट्स के लिए परेशानी का सबब बनता है। कद्दू में ट्रिप्‍टोफेन होता है जो शरीर में सेरोटोनिन बनाने में मदद करता है। ये एमीनो एसिड दिमाग को शांत करता है और नींद लाता है। सेरोटोनिनक शरीर को रिलैक्‍स करता है और बेहतर नींद लाता है।

पेट में कीड़े नहीं होते
जिन बच्‍चों का इम्‍यून सिस्‍टम विकसित हो रहा होता है, उनमें माइक्रोब्‍स, कीड़े और अन्‍य परजीवियों के होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। कद्दू में कृमिनाशक गुण होते हैं जिससे कीड़े और परजीवी दूर रहते हैं और बच्‍चे स्‍वस्‍थ रहते हैं।

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