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गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 सैनिक शहीद, देखिए पूरी लिस्ट

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20 indian soldiers martyr in ladakh
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र्वी लद्दाख में सोमवार रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए। पिछले 5 दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है।

सेना ने शुरू में मंगलवार को कहा कि एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हुए। लेकिन, देर शाम बयान में कहा गया कि 17 अन्य सैनिक “जो अत्यधिक ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में गतिरोध के स्थान पर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्होंने दम तोड़ दिया है। इससे शहीद हुए सैनिकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।” सरकारी सूत्रों ने कहा है कि चीनी पक्ष के सैनिक भी “उसी अनुपात में” हताहत हुए हैं।

आइये देखते हैं चीन के साथ झड़प में शहीद 20 भारतीय जवानों की पूरी सूची-

1-बी. संतोष बाबू, हैदरबाद

2-सूबेदार एन सोरेन, मयुरभंज

3-सुबेदार मनदीप सिंह, पटियाला

4-हवलदार के पलानी, मदुरै

5-हवलदार सुनील कुमार, पटना

6-हवलदार बिपुल रॉय, मेरठ सिटी

7-सूबेदार सतनाम सिंह, गुरदासपुर

8-दीपक कुमार, रेवा

9-सिपाही कुंदन कुमार ओझा, साहिबगंज

10-सिपाही राजेश कुमार, बीरंघम

11-सिपाही गणेश राम, कांकेड़

12-चंद्रकांत प्रधान, कंधमाल

13-सिपाही अंकुश, हमीरपुर

14-सिपाही गुरबिंदर, संगरूर

15-सिपाही गुरतेज सिंह, मनसा

16-सिपाही चंदन कुमार, भोजपुर

17-सिपाही अमन कुमार, समस्तीपुर

18-सिपाही अंकुश, हमीरपुर

19-सिपाही जयकिशोर सिंह, वैशाली

20-सिपाही गणेश हंसदा, ईस्ट सिंहभूम 

1967 के बाद अब तक का सबसे बड़ा टकराव

वर्ष 1967 में नाथू ला में झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच यह सबसे बड़ा टकराव है। उस वक्त टकराव में भारत के 80 सैनिक शहीद हुए थे और 300 से ज्यादा चीनी सैन्यकर्मी मारे गए थे। इस क्षेत्र में दोनों तरफ नुकसान ऐसे वक्त हुआ है जब सरकार का ध्यान कोविड-19 संकट से निपटने पर लगा हुआ है।

सेना के एक बयान में कहा गया, ”भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवान क्षेत्र में जिस स्थान पर 15/16 जून की रात झड़प हुई, वहां से दोनों तरफ के सैनिक हट गए हैं।”

इसमें यह नहीं बताया गया है कि सैन्यकर्मी किस प्रकार हताहत हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच किसी तरह के गोलाबारी का भी उल्लेख नहीं किया गया है। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि झड़प में हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया गया और अधिकतर जवान चीनी पक्ष द्वारा किए गए पथराव और लोहे की छड़ों के इस्तेमाल के कारण घायल हुए।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प क्षेत्र में ”यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के चीनी पक्ष के प्रयास के कारण हुई। चीन की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को चीनी सेना के हवाले से दावा किया कि गलवान घाटी क्षेत्र पर उसकी ”हमेशा संप्रभुता रही है और आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों ने ”जानबूझकर उकसाने वाले हमले किए जिस कारण ”गंभीर संघर्ष हुआ और सैनिक हताहत हुए।

इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इन 52 चीनी मोबाइल एप को लेकर सरकार को किया अलर्ट, देखिए पूरी लिस्ट

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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा है कि या तो चीन से जुड़े 52 मोबाइल एप्लिकेशन को ब्लॉक कर दिया जाए या लोगों को इनका इस्तेमाल ना करने की सलाह दी जाए, क्योंकि इनका इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं है। ये ऐप बड़े पैमाने पर डेटा को भारत से बाहर भेज रहे हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने हिंदुस्तान टाइम्स को यह जानकारी दी है। सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को जो लिस्ट भेजी है उसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप जूम, टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, एक्सएंडर, शेयर इट और क्लीन मास्टर जैसे एप शामिल हैं।

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटेलिजेंस एजेंसियों की ओर से दिया गए प्रस्ताव का समर्थन नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल सेक्रेटिएट ने भी किया है, जिसका मानना है कि ये एप भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।” उन्होंने यह भी विस्तार से बताया कि सभी मोबाइल एप के मानक और उससे जुड़े जोखिम की जांच की जाएगी।

इस साल अप्रैल में गृह मंत्रालय ने जूम के इस्तेमाल को लेकर एक अडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने यह अडवाइजरी नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी एजेंसी कंप्यूटर इमर्जेंसी रेस्पॉन्स टीम इंडिया (CERT-in) के प्रस्ताव पर जारी की थी। भारत पहला देश नहीं है जिसने सरकार में जूम एप के इस्तेमाल पर रोक लगाई। इससे पहले ताइवान ने भी सरकारी एजेंसियों को जूम एप के इस्तेमाल से रोक दिया। जर्मनी और अमेरिका भी ऐसा ही कर चुके हैं। कंपनी ने गृह मंत्रालय की अडवाइजरी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह यूजर्स की सिक्यॉरिटी को लेकर गंभीर है।

सिक्यॉरिटी से समझौता करने वाले मोबाइल एप्स पर कार्रवाई की मांग उठती रही है। वीडियो शेयरिंग एप के स्वामित्व वाली चाइनीज इंटरनेट कंपनी बाइट डांस जैसी कंपनियां इससे इनकार करती रही हैं। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि चाइनीज डिवेलपर्स की ओर से तैयार या चाइनीज लिंक्स वाले एप भले ही वह एंड्रॉयड के लिए हों या आईओस के लिए, इनका इस्तेमाल स्पाइवेयर या अन्य नुकसान पहुंचाने वाले वेयर के रूप में हो सकता है। ऐसी खबरें हैं कि सिक्यॉरिटी एजेंसियों ने सुरक्षाकर्मियों को इन चीनी एप्स का इस्तेमाल ना करने की सलाह दी है क्योंकि इससे उनकी डेटा सिक्यॉरिटी को खतरा है।

चीन से जुड़े हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को लेकर पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी इसी तरह की चिंता जता चुकी हैं। एक तर्क यह भी दिया जाता है कि युद्ध की स्थिति में इनके जरिए कम्युनिकेशन सर्विसेज को नुकसान पहुंचा सकता है।

रडार पर ये एप्स

  • TikTok, Vault-Hide, Vigo Video, Bigo Live, Weibo
  • WeChat, SHAREit, UC News, UC Browser
  • BeautyPlus, Xender, ClubFactory, Helo, LIKE
  • Kwai, ROMWE, SHEIN, NewsDog, Photo Wonder
  • APUS Browser, VivaVideo- QU Video Inc
  • Perfect Corp, CM Browser, Virus Cleaner (Hi Security Lab)
  • Mi Community, DU recorder, YouCam Makeup
  • Mi Store, 360 Security, DU Battery Saver, DU Browser
  • DU Cleaner, DU Privacy, Clean Master – Cheetah
  • CacheClear DU apps studio, Baidu Translate, Baidu Map
  • Wonder Camera, ES File Explorer, QQ International
  • QQ Launcher, QQ Security Centre, QQ Player, QQ Music
  • QQ Mail, QQ NewsFeed, WeSync, SelfieCity, Clash of Kings
  • Mail Master, Mi Video call-Xiaomi, Parallel Space
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चीन की सीनाजोरी, चोरी-छिपे घुसने के बाद गलवान को बता रहा है अपना

  • 15 जून की रात गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सेना की झड़प में चीन के 40 से ज्यादा जवान या तो घायल हुए या मारे गए। वहीं भारत के भी 20 जवान य शहीद हो गए। ऐसे में इतने के बाद भी चीन अपनी अकड़ से बाज नहीं आ रहा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि गालवान घाटी क्षेत्र की संप्रभुता हमेशा चीन से संबंधित रही है। उन्होंने कहा कि – चीनी पक्ष से, हम भारत के साथ और अधिक झड़पों को नहीं देखना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों और हमारी कमांडर स्तर की वार्ता की सर्वसम्मति के बाद भी भारतीय सैनिकों ने हमारी सीमा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। हम भारत से अपने सीमावर्ती सैनिकों को सख्ती से अनुशासित करने, उल्लंघन और उत्तेजक गतिविधि को रोकने के लिए बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने के लिए कहते रहे हैं। हम राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संचार कर रहे हैं। इसका सही और गलत होना बहुत स्पष्ट है । यह घटना एलएसी के चीनी पक्ष में हुई और इसके लिए चीन को दोष नहीं दिया जाए।गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा निकट गलवान घाटी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। जानकारों के मुताबिक, इस इलाके में एलएसी पर कोई विवाद नहीं रहा है, लेकिन चीन अब यहां भी गतिरोध पैदा करने की साजिश कर रहा है। चीन को डर है कि इस इलाके में भारत की मजबूत पकड़ से तिब्बत तक उसके जाने वाले राजमार्ग को खतरा पहुंच सकता है। गलवान सेक्टर बेहद संवेदनशील है, क्योंकि एलएसी के नजदीक डीएस-डीबीओ रोड से जुड़ता है।

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LAC पर हालत बेहद नाजुक, भारत को धोखा देने की फिराक में चीन, शीर्ष स्तर पर दखल की जरूरत

सीमा पर चीन दोहरी चाल चल रहा है। कूटनीतिक व सैन्य स्तर पर चीन से बातचीत के बावजूद भारत चीन की दोहरी चाल से सतर्क है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक चीन पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटता यहां तनाव कम हो पाना मुमकिन नहीं है। कूटनीतिक सूत्रों ने ये भी स्पष्ट किया है कि भारत ने चीन की सीमा में प्रवेश नहीं किया, बल्कि चीन के सैनिकों को अपनी सीमा से बाहर जाने के लिए कहा जा रहा है।

चीन धोखा देने की फिराक में
चीन लगातार धोखेबाजी की रणनीति अपना रहा है। लेफ्टिनेंट स्तर की बातचीत का महत्व भी उसने एक रैंक जूनियर अफसर को भेजकर कम करने का प्रयास किया। उसने पीछे हटने के नाम पर अपना सैन्य दबाव दूसरे इलाकों के साथ गलवान घाटी में बनाए रखा है। पूर्व राजनयिक विवेक काटजू कहना है कि हमें चीन की आक्रामक रणनीति से सावधान रहना होगा। उसकी कथनी और करनी में फर्क है। वो जो कह रहा है उसके बजाय वह क्या कर रहा है हमें इसपर नजर रखनी होगी। चीन को लेकर भारत को अपनी नीति बदलने का सुझाव भी राजनयिक दे रहे हैं।

पर दखल की जरूरत
पूर्व राजनयिक मान रहे हैं कि जिस स्तर पर विवाद पहुंच गया है वहां कूटनीतिक स्तर पर दखल के बिना कोई समाधान सम्भव नही लगता। सूत्रों का कहना है कि कूटनीतिक स्तर पर पर्दे के पीछे कवायद चल रही है।

अहम रणनीतिक लोकेशन पर चीन की नजर
सीमा पर नजर रखने वाले रणनीतिक बल के सूत्रों ने कहा स्थिति नाजुक है। चीन रणनीतिक लिहाज से अहम लोकेशन पर जमे रहना चाहता है। भारत इस स्थिति को स्वीकार नही कर सकता। इसलिए उच्च स्तर पर अगर समाधान की कोशिश नहीं हुई, तो कभी भी स्थिति और विस्फोटक हो सकती है। चीन न केवल गलवान घाटी में, बल्कि पेंगोंग त्सो के फिंगर – 4 से हटने को राजी नही है। जबकि भारत फिंगर – 8 तक अपनी पेट्रोलिंग करता रहा है। इस समय चीनी सैनिकों की मौजूदगी की वजह से हमारे सैनिक फिंगर 4 से आगे नहीं जा सकते।

नेतृत्व की शह से आक्रामकता
सूत्रों ने कहा इस बार चीन का मूवमेंट इस तरह का है कि इसे स्थानीय स्तर से उपजा विवाद नहीं कहा जा सकता। इसमें निश्चित रूप से उच्च राजनीतिक नेतृत्व की सहमति है। इसलिए भारत को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। चीन रणनी

भारत-चीन सैनिकों के बीच कैसे हुई संघर्ष की शुरुआत, जानिए कैसे ड्रैगन को उल्टा पड़ गया पहला वार

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पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर डेढ़ महीने से चली आ रही तनातनी सोमवार रात हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों देशों के बीच बातचीत और सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया के बीच ड्रैगन की आक्रामकता ने रिश्तों को पिछले 45 साल के सबसे बुरे दौर में पहुंचा दिया है। हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए हैं तो चीन को भी भारी नुकसान हुआ है। चीन मारे गए सैनिकों की संख्या तक नहीं बता पा रहा है। हालांकि, इंटसेप्ट से मिली जानकारी के मुताबिक चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

आइए हम आपको बताते हैं कि हिंसक झड़प की शुरुआत कैसे हुई। पहला वार चीनी सैनिकों ने किया लेकिन यह दांव उन्हें उल्टा पड़ गया। भारतीय जांबाजों ने चीन के दर्जनों सैनिक बिछा डाले। लाठी-डंडो और पत्थरों से हुए इस संघर्ष में ड्रैगन के सैनिक धूल चाटने लगे।

असल में भारत-चीन सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई बातचीत और सहमित के मुताबिक 16 बिहार रेजिमेंट को पट्रोलिंग पॉइंट 14 से चीनी सैनिकों के पीछे हटने का इंतजार था। शाम को भारतीय सैनिक यह देखने गए कि चीनी सैनिक वहां से हटे हैं या नहीं।

समझौते के मुताबिक, चीनी सैनिकों को 5 किलोमीटर पूर्व में पोस्ट 1 तक पीछे हटना था। सूर्यास्त होने के बाद अचानक पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) का एक समूह पीछे आया और भारतीय दल की अगुआई कर रहे कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू पर हमला कर दिया। चाइनीज सैनिकों ने सीओ और दो भारतीय जवानों पर लोहे के रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए और जमीन पर गिर पड़े।

इसके बाद मौके पर मौजूद भारतीय सैनिकों ने जोरदार पलटवार किया और दोनों सेना में भीषण संघर्ष हुआ। लाठी-डंडे, पत्थर चलने लगे। दोनों ओर से एक भी गोली नहीं चली, लेकिन घंटों यह हिंसक संघर्ष चलता रहा। बताया जाता है शोक नदी के किनारे आधी रात तक संघर्ष चलता रहा। इस दौरान 20 भारतीय सैनिक बुरी तरह घायल हुए। बाद में ये शहीद हो गए। उधर, चीन के भी दर्जनों सैनिक इस संघर्ष में मारे गए। बाद में चीनी पक्ष की बातचीत को इंटरसेप्ट किया गया तो पता चला कि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं और घायल हुए हैं।

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